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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
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श्लोक 287
श्लोक
3.5.287
কদম্ব-মালার গন্ধে সকল বৈষ্ণব
বিহ্বল হৈলা দেখি’ মহা-অনুভব
कदम्ब-मालार गन्धे सकल वैष्णव
विह्वल हैला देखि’ महा-अनुभव
अनुवाद
उस अद्भुत घटना को देखकर तथा उस कदम्ब माला की मधुर सुगंध को सूँघकर सभी वैष्णव अभिभूत हो गये।
Seeing that wonderful event and smelling the sweet fragrance of that Kadamba garland, all the Vaishnavas were overwhelmed.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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