श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 284
 
 
श्लोक  3.5.284 
দেখিযা কদম্ব-পুষ্প রাঘব-পণ্ডিত
বাহ্য দূর গেল, হৈলা মহা-হরষিত
देखिया कदम्ब-पुष्प राघव-पण्डित
बाह्य दूर गेल, हैला महा-हरषित
 
 
अनुवाद
जब राघव पंडित ने उन कदम्ब के फूलों को देखा, तो वे बाह्य चेतना खो बैठे और हर्ष से भर गए।
 
When Raghava Pandit saw those Kadamba flowers, he lost his external consciousness and was filled with joy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)