श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 274
 
 
श्लोक  3.5.274 
জয-ধ্বনি করিতে লাগিলা ভক্ত-গণ
চতুর্-দিকে হৈল মহা-আনন্দ-বাদন
जय-ध्वनि करिते लागिला भक्त-गण
चतुर्-दिके हैल महा-आनन्द-वादन
 
 
अनुवाद
सभी भक्तगण “जय! जय!” का जाप करने लगे। वाद्यों से चारों दिशाओं में आनंदमय कंपन उत्पन्न होने लगा।
 
All the devotees began chanting, "Jai! Jai!" The musical instruments created joyful vibrations in all directions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)