vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
»
अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
»
श्लोक 274
श्लोक
3.5.274
জয-ধ্বনি করিতে লাগিলা ভক্ত-গণ
চতুর্-দিকে হৈল মহা-আনন্দ-বাদন
जय-ध्वनि करिते लागिला भक्त-गण
चतुर्-दिके हैल महा-आनन्द-वादन
अनुवाद
सभी भक्तगण “जय! जय!” का जाप करने लगे। वाद्यों से चारों दिशाओं में आनंदमय कंपन उत्पन्न होने लगा।
All the devotees began chanting, "Jai! Jai!" The musical instruments created joyful vibrations in all directions.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×