श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 268
 
 
श्लोक  3.5.268 
সন্তোষে সবেই দেন শ্রী-মস্তকোপরি
চতুর্-দিকে সবেই বলেন ’হরি হরি’
सन्तोषे सबेइ देन श्री-मस्तकोपरि
चतुर्-दिके सबेइ बलेन ’हरि हरि’
 
 
अनुवाद
सभी ने प्रसन्नतापूर्वक उनके सिर पर जल डाला और चारों दिशाओं में हरि का नाम जपने लगे।
 
Everyone happily poured water on his head and started chanting the name of Hari in all four directions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)