vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
»
अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
»
श्लोक 268
श्लोक
3.5.268
সন্তোষে সবেই দেন শ্রী-মস্তকোপরি
চতুর্-দিকে সবেই বলেন ’হরি হরি’
सन्तोषे सबेइ देन श्री-मस्तकोपरि
चतुर्-दिके सबेइ बलेन ’हरि हरि’
अनुवाद
सभी ने प्रसन्नतापूर्वक उनके सिर पर जल डाला और चारों दिशाओं में हरि का नाम जपने लगे।
Everyone happily poured water on his head and started chanting the name of Hari in all four directions.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×