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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
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श्लोक 258
श्लोक
3.5.258
যাহারে কহেন—বৃন্দাবনের গাযন
নিত্যানন্দ-স্বরূপের মহা-প্রিযতম
याहारे कहेन—वृन्दावनेर गायन
नित्यानन्द-स्वरूपेर महा-प्रियतम
अनुवाद
वे वृन्दावन के गायक के रूप में विख्यात थे और नित्यानंद स्वरूप के अत्यंत प्रिय थे।
He was famous as a singer of Vrindavan and was very dear to Nityananda Swarup.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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