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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
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श्लोक 251
श्लोक
3.5.251
হেন-মতে নিত্যানন্দ শ্রী-অনন্ত-ধাম
আইলেন গঙ্গা-তীরে পানিহাটী-গ্রাম
हेन-मते नित्यानन्द श्री-अनन्त-धाम
आइलेन गङ्गा-तीरे पानिहाटी-ग्राम
अनुवाद
इस प्रकार भगवान अनन्त के मूल स्वरूप नित्यानंद गंगा के तट पर स्थित पानीहाटी नामक गांव में आये।
Thus, Nityananda, the original form of Lord Ananta, came to a village called Panihati situated on the banks of the Ganga.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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