श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 250
 
 
श्लोक  3.5.250 
পথে যত লীলা করিলেন নিত্যানন্দ
কে বর্ণিবে—কে বা জানে—সকলি অনন্ত
पथे यत लीला करिलेन नित्यानन्द
के वर्णिबे—के वा जाने—सकलि अनन्त
 
 
अनुवाद
नित्यानंद ने मार्ग में जो लीलाएँ कीं, उन्हें कौन जान या वर्णन कर सकता है? वे सब असीमित थीं (या: केवल अनंत ही उन्हें जान और वर्णन कर सकते हैं)।
 
Who can know or describe the pastimes that Nityananda performed on the path? They were all limitless (or: only the infinite can know and describe them).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)