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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
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श्लोक 242
श्लोक
3.5.242
এই মত নিত্যানন্দ—শ্রী-অনন্ত-ধাম
সবারে দিলেন ভাব পরম-উদ্দাম
एइ मत नित्यानन्द—श्री-अनन्त-धाम
सबारे दिलेन भाव परम-उद्दाम
अनुवाद
इस प्रकार अनंत के मूल नित्यानंद ने सभी भक्तों की दिव्य भावनाओं को जागृत किया।
Thus Nityananda, the origin of the infinite, awakened the divine feelings of all the devotees.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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