श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 240
 
 
श्लोक  3.5.240 
কৃষ্ণদাস পরমেশ্বরী-দাস দুই-জন
গোপাল-ভাবে ’হৈ হৈ’ করে অনুক্ষণ
कृष्णदास परमेश्वरी-दास दुइ-जन
गोपाल-भावे ’है है’ करे अनुक्षण
 
 
अनुवाद
कृष्णदास और परमेश्वरीदास हमेशा ग्वालबालों के मन में शोर मचाते रहते थे।
 
Krishnadas and Parameshwaridas always created a ruckus in the minds of the cowherd boys.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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