श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.5.24 
বাসুদেব কান্দিতে কে আছে হেন জন
শুষ্ক কাষ্ঠ-পাষাণাদি করযে ক্রন্দন
वासुदेव कान्दिते के आछे हेन जन
शुष्क काष्ठ-पाषाणादि करये क्रन्दन
 
 
अनुवाद
वासुदेव के रुदन से कौन प्रभावित नहीं हुआ? सूखी लकड़ी या पत्थर के समान कठोर हृदय वाले व्यक्ति भी द्रवित हो उठे।
 
Who was not moved by Vasudeva's cries? Even those with hearts as hard as dry wood or stone were moved.
तात्पर्य
वसुदेव के रोने पर उनके हृदय पत्थर के समान कठोर थे, फिर भी वे अपने आप को संभाल नहीं सके।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)