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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
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श्लोक 230
श्लोक
3.5.230
আজ্ঞা পাই’ নিত্যানন্দ-চন্দ্র তত-ক্ষণে
চলিলেন গৌড-দেশে লৈ’ নিজ-গণে
आज्ञा पाइ’ नित्यानन्द-चन्द्र तत-क्षणे
चलिलेन गौड-देशे लै’ निज-गणे
अनुवाद
भगवान की आज्ञा पाकर नित्यानन्द चन्द्र अपने पार्षदों के साथ तुरन्त गौड़देश के लिए प्रस्थान कर गये।
After receiving the permission of the Lord, Nityananda Chandra immediately left for Gaud Desh with his councillors.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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