श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 220
 
 
श्लोक  3.5.220 
নিত্যানন্দ-প্রসাদে সে সকল সṁসার
অদ্যাপিহ গায শ্রী-চৈতন্য-অবতার
नित्यानन्द-प्रसादे से सकल सꣳसार
अद्यापिह गाय श्री-चैतन्य-अवतार
 
 
अनुवाद
भगवान नित्यानन्द की कृपा से, सम्पूर्ण विश्व अब भगवान चैतन्य की महिमा का गान कर रहा है।
 
By the grace of Lord Nityananda, the entire world is now singing the glories of Lord Chaitanya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)