श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 213
 
 
श्लोक  3.5.213 
কাশী-মিশ্র পরম-বিহ্বল কৃষ্ণ-রসে
আপনে রহিলা প্রভু যাঙ্হার আবাসে
काशी-मिश्र परम-विह्वल कृष्ण-रसे
आपने रहिला प्रभु याङ्हार आवासे
 
 
अनुवाद
काशी मिश्र कृष्ण-प्रेम में मग्न थे। भगवान स्वयं उनके घर में ठहरे थे।
 
Kashi Mishra was deeply immersed in love for Krishna. The Lord himself stayed at his house.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)