श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 212
 
 
श्लोक  3.5.212 
পরমানন্দ-মহাপাত্র মহাশয
যাঙ্র তনু শ্রী-চৈতন্য-ভক্তি-রস-ময
परमानन्द-महापात्र महाशय
याङ्र तनु श्री-चैतन्य-भक्ति-रस-मय
 
 
अनुवाद
परमानंद महापात्र महाशय का शरीर भगवान चैतन्य की भक्ति की मधुरता से भरा हुआ था।
 
Paramananda Mahapatra Mahasaya's body was filled with the sweetness of devotion to Lord Chaitanya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)