श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 211
 
 
श्लोक  3.5.211 
শ্রী-প্রদ্যুম্ন-মিশ্র কৃষ্ণ-প্রেমের সাগর
আত্ম-পদ যাঙ্রে দিলাশ্রী-গৌরসুন্দর
श्री-प्रद्युम्न-मिश्र कृष्ण-प्रेमेर सागर
आत्म-पद याङ्रे दिलाश्री-गौरसुन्दर
 
 
अनुवाद
श्री प्रद्युम्न मिश्र कृष्ण के प्रति परमानंद प्रेम के सागर थे। श्री गौरसुन्दर ने स्वयं उन्हें अपने चरणकमलों में आश्रय दिया था।
 
Sri Pradyumna Mishra was an ocean of ecstatic love for Krishna. Sri Gaurasundara himself gave him shelter at his lotus feet.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)