श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 207
 
 
श्लोक  3.5.207 
প্রভু দেখি’ নৃপতি হৈলা পূর্ণ-কাম
নিরবধি করেন চৈতন্য-পদ-ধ্যান
प्रभु देखि’ नृपति हैला पूर्ण-काम
निरवधि करेन चैतन्य-पद-ध्यान
 
 
अनुवाद
भगवान के दर्शन से राजा की मनोकामना पूरी हुई। उसके बाद वह सदैव भगवान चैतन्य के चरणकमलों का ध्यान करने लगा।
 
The king's wish was fulfilled by the vision of the Lord. Thereafter, he began to meditate on the lotus feet of Lord Chaitanya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)