श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 206
 
 
श्लोक  3.5.206 
চলিলা প্রতাপরূদ্র আজ্ঞা করি’ শিরে
পুনঃ পুনঃ দণ্ডবত করিযা প্রভুরে
चलिला प्रतापरूद्र आज्ञा करि’ शिरे
पुनः पुनः दण्डवत करिया प्रभुरे
 
 
अनुवाद
भगवान को बार-बार प्रणाम करके महाराज प्रतापरुद्र भगवान की आज्ञा को अपने सिर पर लेकर चले गए।
 
After repeatedly bowing to the Lord, Maharaja Prataparudra went away carrying the Lord's command on his head.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)