श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 200
 
 
श्लोक  3.5.200 
প্রভু বলে,—“কৃষ্ণ-ভক্তি হৌক তোমার
কৃষ্ণ-কার্য বিনা তুমি না করিবা আর
प्रभु बले,—“कृष्ण-भक्ति हौक तोमार
कृष्ण-कार्य विना तुमि ना करिबा आर
 
 
अनुवाद
भगवान ने कहा, "तुम कृष्ण की भक्ति प्राप्त करो। कृष्ण की सेवा के अलावा किसी अन्य कार्य में संलग्न न हो।"
 
The Lord said, "You should acquire devotion to Krishna. Do not engage in any other work except serving Krishna."
तात्पर्य
महाराज प्रतापरुद्र की विनम्र प्रार्थनाओं को सुनकर, श्री गौरासुंदर ने उन्हें यह कहकर आशीर्वाद दिया, "आप कृष्ण की भक्ति प्राप्त करें।" चूंकि जीवों का कृष्ण की सेवा के अतिरिक्त कोई कर्तव्य नहीं है, महाप्रभु ने राजा को यह बताते हुए आशीर्वाद दिया कि कृष्ण की सेवा सभी गतिविधियों का मुख्य उद्देश्य है और सभी गतिविधियों को कृष्ण की सेवा करने के उद्देश्य से किया जाना चाहिए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)