श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 194
 
 
श्लोक  3.5.194 
ত্রাহি ত্রাহি সর্ব-দেব-বন্দ্য রমা-কান্ত!
ত্রাহি ত্রাহি ভক্ত-জন-বল্লভ একান্ত!
त्राहि त्राहि सर्व-देव-वन्द्य रमा-कान्त!
त्राहि त्राहि भक्त-जन-वल्लभ एकान्त!
 
 
अनुवाद
"हे लक्ष्मीजी के प्रिय स्वामी, मेरी रक्षा कीजिए! आप सभी देवताओं द्वारा पूजित हैं। हे भक्तों पर अत्यन्त स्नेह करने वाले, मेरी रक्षा कीजिए!
 
"O beloved lord of Lakshmi, protect me! You are worshipped by all the gods. O one who is very affectionate towards his devotees, protect me!
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)