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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
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श्लोक 193
श्लोक
3.5.193
ত্রাহি ত্রাহি স্বতন্ত্র-বিহারি কৃপা-সিন্ধু!
ত্রাহি ত্রাহি শ্রী-কৃষ্ণ-চৈতন্য দীন-বন্ধু!
त्राहि त्राहि स्वतन्त्र-विहारि कृपा-सिन्धु!
त्राहि त्राहि श्री-कृष्ण-चैतन्य दीन-बन्धु!
अनुवाद
"हे परम स्वतंत्र दया के सागर, मेरी रक्षा करो! हे दीन-दुखियों के मित्र श्री कृष्ण चैतन्य! मेरी रक्षा करो!
"O Ocean of Supremely Free Mercy, protect me! O friend of the poor and the distressed, Sri Krishna Chaitanya! Protect me!
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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