vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
»
अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
»
श्लोक 184
श्लोक
3.5.184
এতেকে ক্ষমহ প্রভু, মোর অপরাধ
নিজ-দাস করি’ মোরে করহ প্রসাদ”
एतेके क्षमह प्रभु, मोर अपराध
निज-दास करि’ मोरे करह प्रसाद”
अनुवाद
"अतः हे प्रभु, कृपया मेरे अपराधों को क्षमा करें। मुझे अपना सेवक स्वीकार करके मुझ पर दया करें।"
"So, O Lord, please forgive my sins. Accept me as your servant and have mercy on me."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×