श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 180
 
 
श्लोक  3.5.180 
এই মতে প্রতাপরূদ্রেরে কৃপা করি’
সিṁহাসনে বসি’ হাসে গৌরাঙ্গ-শ্রী-হরি
एइ मते प्रतापरूद्रेरे कृपा करि’
सिꣳहासने वसि’ हासे गौराङ्ग-श्री-हरि
 
 
अनुवाद
इस प्रकार प्रतापरुद्र पर कृपा करके भगवान गौरांग सिंहासन पर बैठे और मुस्कुराये।
 
Thus, showing mercy to Prataparudra, Lord Gauranga sat on the throne and smiled.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)