vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
»
अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
»
श्लोक 180
श्लोक
3.5.180
এই মতে প্রতাপরূদ্রেরে কৃপা করি’
সিṁহাসনে বসি’ হাসে গৌরাঙ্গ-শ্রী-হরি
एइ मते प्रतापरूद्रेरे कृपा करि’
सिꣳहासने वसि’ हासे गौराङ्ग-श्री-हरि
अनुवाद
इस प्रकार प्रतापरुद्र पर कृपा करके भगवान गौरांग सिंहासन पर बैठे और मुस्कुराये।
Thus, showing mercy to Prataparudra, Lord Gauranga sat on the throne and smiled.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×