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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
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श्लोक 179
श्लोक
3.5.179
তুমি যে আমারে ঘৃণা করি’ গেলা মনে
তবে তুমি আমারে স্পর্শিবে কি কারণে”
तुमि ये आमारे घृणा करि’ गेला मने
तबे तुमि आमारे स्पर्शिबे कि कारणे”
अनुवाद
“आज सुबह तुम्हें मुझसे घृणा हुई और तुम घर चले गए, तो अब तुम मुझे क्यों छू रहे हो?”
“You felt disgusted by me this morning and went home, so why are you touching me now?”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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