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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
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श्लोक 176
श्लोक
3.5.176
আমারে স্পর্শিতে কি তোমার যোগ্য হয?”
এত বলি’ ভৃত্যে চাহি’ হাসে দযা-ময
आमारे स्पर्शिते कि तोमार योग्य हय?”
एत बलि’ भृत्ये चाहि’ हासे दया-मय
अनुवाद
“क्या मैं तुम्हारे स्पर्श के योग्य हूँ?” ये शब्द कहने के बाद, दयालु भगवान ने अपने सेवक की ओर देखा और मुस्कुराये।
“Am I worthy of your touch?” Having said these words, the merciful Lord looked at his servant and smiled.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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