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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
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श्लोक 174
श्लोक
3.5.174
আমি যে নাচিতে আজি তুমি গিযাছি
লাঘৃণা কৈলে মোর অঙ্গে দেখি’ ধূলা-লালা
आमि ये नाचिते आजि तुमि गियाछि
लाघृणा कैले मोर अङ्गे देखि’ धूला-लाला
अनुवाद
“आज जब तुम मुझे नाचते हुए देखने गए, तो मेरे शरीर को धूल और लार से ढका हुआ देखकर तुम्हें घृणा हुई।
“Today when you went to see me dance, you were disgusted to see my body covered with dust and saliva.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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