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श्लोक 3.5.169  |
দুই শ্রী-নাসায জল পডে নিরন্তর
শ্রী-মুখের লাল পডে, তিতে কলেবর |
दुइ श्री-नासाय जल पडे निरन्तर
श्री-मुखेर लाल पडे, तिते कलेवर |
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| अनुवाद |
| उनके दोनों नथुनों से निरन्तर जल बहता रहता था और उनका शरीर उनके मुख की लार से भीग जाता था। |
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| Water flowed continuously from both his nostrils and his body was drenched with the saliva from his mouth. |
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