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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
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श्लोक 168
श्लोक
3.5.168
রাজা দেখে—জগন্নাথ-অঙ্গ ধূলা-ময
দুই শ্রী-নযনে যেন গঙ্গা-ধারা বয
राजा देखे—जगन्नाथ-अङ्ग धूला-मय
दुइ श्री-नयने येन गङ्गा-धारा वय
अनुवाद
राजा ने देखा कि जगन्नाथ का शरीर धूल से ढका हुआ है और उनकी दोनों आँखों से गंगा की धाराओं के समान आँसू बह रहे हैं।
The king saw that Jagannatha's body was covered with dust and tears were flowing from both his eyes like the streams of the Ganges.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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