श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 167
 
 
श्लोक  3.5.167 
সুকৃতি প্রতাপরুদ্র রাত্রে স্বপ্ন দেখে
স্বপ্নে গিযাছেন জগন্নাথের সম্মুখে
सुकृति प्रतापरुद्र रात्रे स्वप्न देखे
स्वप्ने गियाछेन जगन्नाथेर सम्मुखे
 
 
अनुवाद
उस रात भाग्यशाली प्रतापरुद्र ने स्वप्न में भगवान जगन्नाथ को अपने सामने प्रकट होते देखा।
 
That night, the fortunate Prataparudra saw Lord Jagannath appear before him in his dream.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)