श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 163
 
 
श्लोक  3.5.163 
কারো স্থানে ইহা রাজা না করি’ প্রকাশ
পরম সন্তোষে রাজা গেলা নিজ-বাস
कारो स्थाने इहा राजा ना करि’ प्रकाश
परम सन्तोषे राजा गेला निज-वास
 
 
अनुवाद
राजा ने यह बात किसी को नहीं बताई और बहुत संतुष्ट होकर अपने घर लौट गया।
 
The king did not tell this to anyone and returned to his home very satisfied.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)