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श्लोक 3.5.154  |
এই মত কত হয অনন্ত বিকার
কত হয কত যায লেখা নাহি তার |
एइ मत कत हय अनन्त विकार
कत हय कत याय लेखा नाहि तार |
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| अनुवाद |
| इस प्रकार प्रेम के जो असीमित परिवर्तन हुए और लुप्त हुए, उनका वर्णन नहीं किया जा सकता। |
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| Thus the infinite changes and disappearances of love cannot be described. |
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