श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 143
 
 
श्लोक  3.5.143 
রাজা বলে,—“তুমি-সব, যদি কর ভয
অগোচরে আমারে দেখাহ মহাশয”
राजा बले,—“तुमि-सब, यदि कर भय
अगोचरे आमारे देखाह महाशय”
 
 
अनुवाद
राजा ने कहा, "यदि आप सभी भयभीत हैं, तो कम से कम ऐसा प्रबंध करो कि मैं उसे बिना उसकी जानकारी के देख सकूँ।
 
The king said, “If you are all so afraid, at least arrange for me to see her without her knowledge.
तात्पर्य
सन्यासी का राजा या स्त्री को देखना और उनसे संवाद करना वर्जित है। जो व्यक्ति राजा का आशीर्वाद पाकर अपनी इंद्रियतृप्ति की कामना करता है, वह राजा से मिलने की इच्छा रखता है। शिष्टाचार के सिद्धांतों को स्थापित करने के लिए, महाप्रभु ने न तो स्त्रियों, जो भोग की वस्तु हैं, से बात की या उन्हें देखा, और न ही राजा से, जिन्हें अनुग्रह प्राप्त करने के लिए संपर्क किया जाता है। इसलिए किसी भी भक्त ने उतकल के राजा को महाप्रभु से मिलवाने की हिम्मत नहीं की; वे बहुत अधिक डरे हुए थे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)