श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.5.14 
জয জয করে গৃহে পতি-ব্রতা-গণ
হৈল আনন্দ-ময শ্রীবাস-ভবন
जय जय करे गृहे पति-व्रता-गण
हैल आनन्द-मय श्रीवास-भवन
 
 
अनुवाद
घर की सती स्त्रियाँ मंगल ध्वनि करने लगीं और श्रीवास का सारा घर आनंद से भर गया।
 
The chaste women of the house started chanting auspicious songs and the entire house of Shrivas was filled with joy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)