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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
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श्लोक 137
श्लोक
3.5.137
দেখিযা অদ্ভুত সব উত্কলের লোক
কারো দেহে আর নাহি রহে দুঃখ-শোক
देखिया अद्भुत सब उत्कलेर लोक
कारो देहे आर नाहि रहे दुःख-शोक
अनुवाद
उत्कल के लोग यह देखकर आश्चर्यचकित हो गए, और परिणामस्वरूप उन्हें कोई कष्ट या शोक महसूस नहीं हुआ।
The people of Utkala were astonished to see this, and as a result they felt no pain or grief.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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