श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 136
 
 
श्लोक  3.5.136 
জগন্নাথ দেখিতে যে প্রকাশেন প্রেম
অকথ্য অদ্ভুত!—গঙ্গাধারা বহে যেন
जगन्नाथ देखिते ये प्रकाशेन प्रेम
अकथ्य अद्भुत!—गङ्गाधारा वहे येन
 
 
अनुवाद
भगवान जगन्नाथ के दर्शन करते समय उनका जो आनंदमय प्रेम प्रकट हुआ, वह अद्भुत और अवर्णनीय था। उनकी आँखों से गंगा की धाराओं के समान आँसू बह रहे थे।
 
The joyful love that manifested in him upon seeing Lord Jagannatha was amazing and indescribable. Tears flowed from his eyes like the Ganges.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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