श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 134
 
 
श्लोक  3.5.134 
এ-মত নিরন্তর প্রেমের বিলাস
তিলার্ধেকো অন্য কর্ম নাহিক প্রকাশ
ए-मत निरन्तर प्रेमेर विलास
तिलार्धेको अन्य कर्म नाहिक प्रकाश
 
 
अनुवाद
इस प्रकार वे निरन्तर आनन्दमय लीलाएँ करते रहे। उन्होंने एक क्षण के लिए भी अन्य कोई कार्य नहीं किया।
 
Thus He continued to perform blissful pastimes. He did not do anything else even for a moment.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)