श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 131
 
 
श्लोक  3.5.131 
নিরন্তর নৃত্য-গীত-আনন্দ-আবেশ
প্রকাশেন গৌরচন্দ্র, দেখে সর্ব-দেশ
निरन्तर नृत्य-गीत-आनन्द-आवेश
प्रकाशेन गौरचन्द्र, देखे सर्व-देश
 
 
अनुवाद
सभी प्रांतों के लोगों ने गौरचन्द्र को निरंतर नृत्य और गायन करते हुए परमानंद से अभिभूत होते देखा।
 
People from all the provinces saw Gaurchandra in ecstasy, dancing and singing continuously.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)