श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 128
 
 
श्लोक  3.5.128 
চির-দিন প্রভুর বিরহে ভক্ত-গণ
আনন্দে প্রভুরে দেখি’ করেন কীর্তন
चिर-दिन प्रभुर विरहे भक्त-गण
आनन्दे प्रभुरे देखि’ करेन कीर्तन
 
 
अनुवाद
भक्तगण कई दिनों से भगवान से वियोग की भावना से ग्रस्त थे। अब भगवान के दर्शन पाकर वे आनंदपूर्वक कीर्तन करने लगे।
 
The devotees had been suffering from a sense of separation from the Lord for many days. Now, having seen the Lord, they began to sing kirtan with joy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)