श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 120
 
 
श्लोक  3.5.120 
এতেকে তোমার নাম ’ভাগবতাচার্য’
ইহা বিনা আর কোন না করিহ কার্য”
एतेके तोमार नाम ’भागवताचार्य’
इहा विना आर कोन ना करिह कार्य”
 
 
अनुवाद
"इसलिए मैं आपको भागवत आचार्य नियुक्त करता हूँ। आपका एकमात्र कर्तव्य श्रीमद्भागवत का पाठ करना है।"
 
"Therefore I appoint you as Bhagavata Acharya. Your sole duty is to recite the Srimad Bhagavata."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)