श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 118
 
 
श्लोक  3.5.118 
বাহ্য পাই’ বসিলেন শ্রী-শচীনন্দন
সন্তোষে দ্বিজেরে করিলেন আলিঙ্গন
बाह्य पाइ’ वसिलेन श्री-शचीनन्दन
सन्तोषे द्विजेरे करिलेन आलिङ्गन
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् श्रीशचिनन्दन को पुनः चेतना प्राप्त हुई और उन्होंने प्रसन्नतापूर्वक उस ब्राह्मण को गले लगा लिया।
 
After that Shri Sachinandan regained consciousness and happily embraced the Brahmin.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)