श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 117
 
 
श्लोक  3.5.117 
এই মত রাত্রি তিন-প্রহর-অবধি
ভাগবত শুনিযা নাচিলা গুণ-নিধি
एइ मत रात्रि तिन-प्रहर-अवधि
भागवत शुनिया नाचिला गुण-निधि
 
 
अनुवाद
इस प्रकार भगवान, जो दिव्य गुणों के सागर हैं, उस रात्रि को श्रीमद्भागवत सुनते हुए नौ घंटे तक नृत्य करते रहे।
 
Thus the Lord, who is the ocean of transcendental qualities, danced for nine hours that night while listening to the Srimad Bhagavatam.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)