श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 112
 
 
श्लोक  3.5.112 
শুনিযা তাহান ভক্তি-যোগের পঠন
আবিষ্ট হৈলা গৌরচন্দ্র নারাযণ
शुनिया ताहान भक्ति-योगेर पठन
आविष्ट हैला गौरचन्द्र नारायण
 
 
अनुवाद
जब गौरचन्द्र नारायण ने उनकी भक्तिमय सेवा की महिमा से युक्त श्लोकों का पाठ सुना, तो वे परमानंद में लीन हो गये।
 
When Gaurachandra Narayana heard the recitation of verses glorifying his devotional service, he was absorbed in ecstasy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)