श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.5.11 
বৈকুণ্ঠ-নাযক গৃহে পাইযাশ্রীবাস
হেন নাহি জানেন কি জন্মিল উল্লাস
वैकुण्ठ-नायक गृहे पाइयाश्रीवास
हेन नाहि जानेन कि जन्मिल उल्लास
 
 
अनुवाद
वैकुण्ठ के स्वामी को अपने घर में पाकर श्रीवास की प्रसन्नता की सीमा न रही।
 
Srivas's happiness knew no bounds after finding the Lord of Vaikuntha in his home.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)