श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 108
 
 
श्लोक  3.5.108 
রাঘব-পণ্ডিত-প্রতি যে প্রীতি তোমার
সে কেবল সুনিশ্চয জানিহ আমার”
राघव-पण्डित-प्रति ये प्रीति तोमार
से केवल सुनिश्चय जानिह आमार”
 
 
अनुवाद
“यह निश्चित जान लो कि मेरे प्रति तुम्हारा प्रेम राघव पंडित के प्रति तुम्हारे प्रेम से प्रकट होगा।
 
“Know for sure that your love for me will be revealed through your love for Raghava Pandit.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)