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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
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श्लोक 106
श्लोक
3.5.106
এতেকে হৈযা তুমি মহা-সাবধান
নিত্যানন্দ সেবিহ—যেহেন ভগবান্”
एतेके हैया तुमि महा-सावधान
नित्यानन्द सेविह—येहेन भगवान्”
अनुवाद
“इसलिए तुम्हें नित्यानंद की अत्यंत सावधानी से सेवा करनी चाहिए, क्योंकि तुम्हें उन्हें स्वयं परमेश्वर ही जानना चाहिए।”
“Therefore you must serve Nityananda with utmost care, for you must know him to be the Supreme Lord Himself.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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