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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
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श्लोक 100
श्लोक
3.5.100
রাঘব পণ্ডিত-প্রতি শ্রী-গৌরসুন্দর
নিভৃতে করিল কিছু রহস্য-উত্তর
राघव पण्डित-प्रति श्री-गौरसुन्दर
निभृते करिल किछु रहस्य-उत्तर
अनुवाद
श्री गौरसुन्दर ने एकान्त स्थान में राघव पंडित से कुछ गोपनीय बातें कहीं।
Shri Gaursundar told some confidential things to Raghav Pandit in a secluded place.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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