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श्लोक 3.4.91  |
প্রভু-সঙ্গে কথা কহিবারে নাহি ক্ষণ
ভক্ত-বর্গ-স্থানে কথা কহিল ব্রাহ্মণ |
प्रभु-सङ्गे कथा कहिबारे नाहि क्षण
भक्त-वर्ग-स्थाने कथा कहिल ब्राह्मण |
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| अनुवाद |
| भगवान से बात करने का कोई अवसर न मिलने पर ब्राह्मण ने भक्तों को अपना संदेश दिया। |
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| Having no opportunity to speak to the Lord, the Brahmin gave his message to the devotees. |
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