|
| |
| |
श्लोक 3.4.88  |
অন্য-জন-সহিত কথার কোন্ দায?
নিজ-পারিষদেই সম্ভাষা নাহি পায |
अन्य-जन-सहित कथार कोन् दाय?
निज-पारिषदेइ सम्भाषा नाहि पाय |
| |
| |
| अनुवाद |
| दूसरों से बातचीत की तो बात ही क्या, भगवान् अपने ही साथियों से भी बातचीत नहीं करते थे। |
| |
| Forget about talking to others, God did not even talk to his own companions. |
| ✨ ai-generated |
| |
|