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श्लोक 3.4.69  |
মাথা মুডাইযা সন্ন্যাসীর বেশ ধরে
চৈতন্যের গুণ শুনিঽ পোডযে অন্তরে |
माथा मुडाइया सन्न्यासीर वेश धरे
चैतन्येर गुण शुनिऽ पोडये अन्तरे |
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| अनुवाद |
| कुछ लोग अपना सिर मुंडाकर संन्यासी का वेश धारण कर लेते हैं, किन्तु जब वे भगवान चैतन्य की महिमा सुनते हैं तो उनके हृदय जलने लगते हैं। |
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| Some people shave their heads and wear the garb of a sannyasi, but when they hear the glories of Lord Chaitanya, their hearts burn. |
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