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श्लोक 3.4.516  |
এ সকল রঙ্গ প্রভু করিলেন যত
মনুষ্যের শক্তি ইহা বর্ণিবেক কত |
ए सकल रङ्ग प्रभु करिलेन यत
मनुष्येर शक्ति इहा वर्णिबेक कत |
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| अनुवाद |
| मनुष्य में भगवान की इन समस्त लीलाओं का वर्णन करने की शक्ति कैसे हो सकती है? |
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| How can a human being have the power to describe all these pastimes of the Lord? |
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