श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 4: श्री अच्युतानंद की लीलाओं का वर्णन और श्री माधवेन्द्र का पूजन  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  3.4.50 
কে-মত তাঙ্হার কথা, কে-মত মনুষ্য
কে-মত গোসাঞি তিঙ্হো, কহিবা অবশ্য
के-मत ताङ्हार कथा, के-मत मनुष्य
के-मत गोसाञि तिङ्हो, कहिबा अवश्य
 
 
अनुवाद
“मुझे बताओ, वह क्या उपदेश देते हैं, वह किस प्रकार के व्यक्ति हैं, और वह किस प्रकार के संन्यासी हैं?
 
“Tell me, what does he preach, what kind of person is he, and what kind of monk is he?
तात्पर्य
तिन्हो शब्द का अर्थ है “वह”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)